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अपने को गंवाकर इस जगत में कमाने जेसा कुछ भी नहीं हे ।


एक आदमी को सिगरेट पीने की आदत हे , उसे सारी दुनिया बुरा कहेती हे . दुसरे को माला फेर ने की आदत हे , उसे सारी दुनिया अच्छा कहेती हे . जो सिगरेट ना पिए तो मुसीबत मालूम पड़ती हे . जो माला फेर ताहे अगर न फेरने दो तो मुसीबत मालूम पड़ती हे दोनों गुलाम हे ।


एक को उठते ही सिगरेट चाहिए , दुसरे को उठते ही माला चाहिए माला वाले को माला न मिले तो माला की तलफ लगती हे अगर न फेरने दो तो मुसीबत मालूम पड़ती हे , दोनों गुलाम हे ।
एक को उठते ही सिगरेट चाहिए. एसे बुनियाद में बहोत फासला नहीं हे सिगरेट भी एक तरह का माला फेरना हे धुआं भीतर ले गए, बाहर ले गये ,भीतर ले गए, बाहर ले गये - मनके फिरा रहे हे ,बाहर ,भीतर . धुएं की माला हे . जरा सुक्ष्म हे . मोती के माला स्थुल हे . कोय आदत इसी नहो जाए की मालिक बन जाये . मालकियत बचाकर आदत का उपयोग कर लेना यही साधना हे मालकियत खो दी , और आदत सवार हो गई तो तुम यंत्रवत हो गए अब तुम्हारा जीवन मूर्च्छित हे ।


इसे लोग भी हे जो पूजा न करे रोज , तो बेचेनी लगती हे , उसे पुछो की पूजा करने से कुछ आनंद मिलता हे ? वो कहते हे , आनंद तो कुछ मिलता नहीं लेकिन न करे तो बेचेनी लगती हे
आदते बुरी होया भलि, इससे कोई भेद नहीं पड़ता जब आदते मालिक हो जाये तो बुरी हे .तुम मालिक रहो तो कोय आदत बुरी नही गुलामी बुरी हे मालकियत भली हे ।


संसार में कुछ भी बुरा नहीं हे स्वामित्व तुम्हारा हो तो संसार में सभी कुछ अच्छा हे स्वामित्व खो गया तुम गुलाम हो जाओ तो आदते बुरी हो या भलि, इससे कोई भेद नहीं पड़ता जब आदते मालिक हो जाये तो बुरी हे .तुम मालिक रहो तो कोय आदत बुरी नही गुलामी बुरी हे मालकियत भली हे जीवन में आदते जरुरी हे . बस इतना ध्यान रखना की आदत मालिक न हो जाये . स्वामित्व खो गया तुम गुलाम हो जाओ तो वह गुलामी चाहे कितनी ही कीमती हो , खतरनाक हे . हीरे - जवाहरात लगेहो जंजीरों पर तो उसको आभुषण मत समझ लेना वे खतरनाक हे वह महेगा सोदा हे

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