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गाँव के नेताजी

एक आदमी ने गाँव के नेता जी को किसी बात पर सच्ची बात कह दी ।
कह दिया कि उल्लू के पटृठे हो!

अब नेताजी को उल्लू का पटृठा कहो तो नेता जी कुछ ऐसे ही नहीं छोड देगें।
उन्होनें अदालत मे मुकदमा मानहानि का चलाया।मुल्ला नसरुद्दीन नेता जी के पास ही खडा था तो उसको गवाही मे लिया ।

जिसने गाली दी थी नेताजी को , उसने मजिस्ट्रेट को कहा कि होटल में कम से कम पचास लोग ,जरुर मैने उल्लू का पटृठा शब्द का उपयोग किया है; लेकिन मैने किसी का नाम नही लिया । नेता जी कैसे सिध्ध कर सकते हैं कि मैने इन्ही को उल्लू का पटृठा कहा है।

नेता जी ने कहा : सिध्ध कर सकता हूँ। मेरे पास गवाह हैं। मुल्ला को खडा किया गया ।
मजिस्ट्रेट ने पूछा कि मुल्ला , तुम गवाही देते हो कि इस आदमी ने नेता जी को उल्लू का पटृठा कहा है! मजिस्ट्रेट ने कहा : तुम कैसे इतने निशिचत हो सकते हो? वहाँ तो पचास लोग मौजूद थे, इसने किसी का नाम तो लिया नहीं। नसरुद्दीन ने कहा : नाम लिया हो कि न लिया हो, पचास मौजूद हों कि पांच सौ मौजूद हों , मगर वहां उल्लू का पटृठा केवल एक था ।

वह नेता जी ही थे ! मै अपने बेटे की कसम खाकर कहता हूँ कि वहां कोई और दूसरा उल्लू का पटृठा था ही नहीं , यह कहता भी तो किसको ?

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